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काव्यपुष्प

 आजची चारोळी

   स्व- मधला अहं संपवून
  सदैव नम्र बनव मजला
   हा नश्वर देह सत्कारणी लागो
   हीच ईशा प्रार्थना तुजला

सौ. हेमा जाधव, सातारा

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शब्दगंध 

आयुष्यात येई अनुभव 
होई परीक्षा मानवाची 
निर्णय एक चुकला जरी 
घडी विस्कळीत होई जीवनाची 

 सौ मधुरा कर्वे. ( भावगंधा )
पुणे.

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झेप 

 हरलो नाही कणा शाबूत आहे,
उंच आकाशी झेप घेण्याकरीता..
अविश्रांत होऊन मी लढतो आहे,
जशी डोंगर चिरून जाते सरिता..

✍️ Silent Night
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 चारोळी

हरलो नाही हरणार नाही
शाबूत आहे कणा
लाख संकटे झेलील असा
मजबुत आहे बाणा

✍️ अरुण
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सोबती

फुले सुंदर
मनास देई शांती
जीवन क्रांती


हसत मुखे
करिती ते स्वागत
स्थान मनात

प्रसन्न करी
वातावरण सारे
सोबती खरे

सौ उषा राऊत
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विषय:  स्वप्नांचा मागोवा
शीर्षक:- स्वप्न पूर्ती

डॉ.बाबासाहेबांची मी लेक
विचारांची घेऊनी लेखणी
DBA ग्रुप वर करते पेरणी
अशी लाखात संगीता देखणी...

फुलवितो मळा विचारांचा
केलेले महान कार्याचा
बहुजन हितांसाठी झटणारा
बहुजन नायक कराराचा

चार चार पोरांचे दिले बलिदान
जग विख्यात घटनाकार
विज्ञानवादी मनो वैज्ञानिक
जातीवादाचा कर्क रोग कापला चराचर

एका हो ! हो ऐका! बहुजन हो
तुम्हा,आम्हाला दिले माणूसपण
पशू तुल्य होते हो आपले जीवन
कुत्रे मांजरा पेक्षा हिन होते जीवन
 
लावा घरोघरी विचारांचे दीप
विखुरलेल्या नेत्यांनो व्हा एक
क्रांती ची मशाल,हाती घेऊन
करू कार्य  सारे जनहिताचे नेक

तथागताची  सत्य वाणी,विचार
आचरणात आनू  आपल्या घरात
प्रज्ञावंत होऊ सारे घर परिवार
विचार रुपी बीजे पेरू माणसात

संगीता रामटेके गडचिरोली
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 मनाजोगे जगून घे...!

अमूल्य हा जन्म मनुष्या 
मनाजोगे जगून घे
अवतीभवती फक्त 
सकारात्मकतेने बघून घे

माता आणि माती
यातली एक वेलांटी 
इथपर्यंतचा प्रवास
म्हणजे असतं जीवन;
कधी सरळसोट
तर कधी नागमोडी वळण
कुठे टक्कल पडले डोंगर
कुठे हिरवं गार वन
हिरव्या वनात मोरासारखं
पिसारा फुलवून नाचून घे
अमूल्य हा जन्म मनुष्या 
मनाजोगे जगून घे
अवतीभवती फक्त 
सकारात्मकतेने बघून घे

वाटेत सहप्रवासी भेटतील,
सोबत रमतील..
काही नको तितके खेटतील..
जुने साथ सोडतील, 
नवे वाट धरतील,
कुणाशी जुळते नाळ तर
कुणाशी खटके उडतील....
कुणी नडतील.. कुणी भिडतील
कुणी वापरून घेतील
कुणी पाया पडतील
तेव्हा
आपलं कोण.. परकं कोण?
हे जरासं समजून घे
अमूल्य हा जन्म मनुष्या 
मनाजोगे जगून घे
अवतीभवती फक्त 
सकारात्मकतेने बघून घे

कशात काय .. फाटक्यात पाय?
दळीद्री हा सोड विचार
बदलत असतो निसर्ग
तु ही बदल तुझा आचार
समजून घे,उमजून घे
परोपकारी जगायला शिक
माणूस होणं जमलं तर
बिघडलेलं होईल ठिक
झ-यासारखा निर्मळ हो
चिखलातलं हसरं कमळ हो
झाडासारखी छाया धर
धरणीसारखी माया कर
पाखरागत आभाळाला भिड
कणखर हो अन् निर्भिड
थोडक्यात काय
माणुसकी पेर सभोवती
दगड फोडून रूजून ये
अमूल्य हा जन्म मनुष्या 
मनाजोगे जगून घे
अवतीभवती फक्त 
सकारात्मकतेने बघून घे


✍️ अरूण मोर्ये
सत्कोंडी, रत्नागिरी
८८०६८९०५५८
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मिल लेते है...

चलो आज ख़ुद से  मिल लेते है।
मिल कर मन  हल्का कर लेते है।

दर्पण  के सामने खड़े  होकर दो
चार  सवाल ख़ुद से  पूछ लेते है।

धड़कने तेज़ और आँखो में दर्द 
उभर  आए तो  थोड़ा  रो लेते है।

दो रोटी के  लिए  हम  भी कभी 
कभी मौत का खेल खेल लेते है।

हर एक  दिन  को अपना नसीब 
समझ कर हँसते  हुए जी लेते है।

ज़माना तो  ख़राब  है ए ज़िंदगी 
आज  हम तुझ से  मिल  लेते है।

नीक राजपूत
9898693535
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विषय चित्र काव्य
शीर्षक :चवदार तळे सत्याग्रह

माणूस म्हणून माणसाला 
नव्हता कोणताच अधिकार
कत्रे, मांजरी पित होते पाणी
पण माणूस पाण्यापासून दुर

महाडच्या चवदार तळ्याचा
केला भीमाने सत्याग्रह मोठा
बहुजन दलीत होते संगतीत
ओंजळीने पाणी घेई घोठं घोठा

समाजासाठी खुले चवदार तळे
हक्क मिळवून देण्यासाठी झटला
ओंजळीने दलीत पाणी प्यायले
आनंदाला सर्वांच्या उधाण आला

आठवले आज चवदारचे तळे
सत्याग्रह ,आंदोलने केली भीमाने
पिण्याच्या पाण्यासाठी भटकती
आमचे पूर्वज  व्याकुळ तृष्णाने

माणूस माणसाचा माने विंटाळ
गळ्यात मडके ,कमरेला  फळा  
सावली आमची नव्हती चालणार
साहेबांना समजली आमची कळा

न्याय मिळवून दिले माणसाला
उच्च शिक्षित झाले तुझे लेकरे
पण तुझ्या कार्याचा विसर पडला
स्व :स्वार्थासाठी  विके स्व:ले सारे

संगीता रामटेके गडचिरोली
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 जिवाची हुरहूर......

किती किती पाहाची वाट
सजणा येशील लवकर
एकच मागणे देवाला
तुझ्यासम मिळो मज लवर

हातात हात घेऊन
राहू एकमेंका सोबत
येता किती दुःखे ती
सामोरे आपण जाऊत

नशिबाचा फेरा मज
लागतो भोग भोगाया
यावेळी ना मिळलास
पुढे मीच येंनार भेटाया

सुख दुःखाची नाळ
जुळवू मन आपसात
प्रेम देऊ प्रेम घेऊ
राहू रे आनंदात

संगिता रामटेके गडचिरोली
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 एकटीच जळते वणव्यात....

एकटीच जळते वणव्यात
दुखांच्या ज्योतीसम दिस रात
उभी त्ताठ स्वाभिमानाने
पण सत्याला देई ना कोणी सात

होळपळून निघतो आगीत
 अन्यायाच्या विरोधात तक्रार
करता करता जन लोका त
पण उपयोग काहीच न होणार

जिवंत पणी जलते सरणात
पण दया ना येणार कोणा
असा कोणता रे जगावेगळा
केला असेल मीच गुन्हा

चोर अत्याचारी बदमाशला
मिळतोय समाजात मान
पैशाच्या जोरावर चोराला
दुरूनच खाली झुकविती मान

एक जिवंत व्यक्ती जळते
त्याचे कदापि नसे भान
पण टी वी.वर पाहून दृश्ये
नाटक करती रडण्याचा छान

मनात जळतोय ,मन मारून सारी
वर वर दाखवा लागे हसत हसत
जणू फिल्मी नट नट्या अदाकारी
स्वतः लाच फसवत फसवत

✍️संगीता रामटेके गडचिरोली


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