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काव्यपुष्प



विषय: लाभले हे मज निसर्गाचे वरदान
शीर्षक:- वनराईच्या कुशीत

लेक मी झाडीपट्टीची आहे
भाषा बोलते झाडी बोली
वनराईच्या कुशीत वसले
माझे गाव डोंगर पायथ्या खाली

दाट जंगले,गर्द वनराईत 
हिरव्या , मन मोहोक रुपात
पाहून मोह आवरेना कुणाचे
मोहात पडती हिरवळ रंगात

गर्द रानात पावसाला येई वेग
उंच उंच डोंगर, पर्वत, कपार
पशू पक्षी किलबिलाट मधुर स्वर
हिरवाईने नटलेली रान हिरवीगार

बघा! कसा निसर्गाच्या सोबतीने
वास्ते, सात्या, कुळ्याचे फुल
वेरोण्या , काकया, चार, बोरं 
रान मेवा शक्तिवर्धक कवठ, बेल

लाभले हे मज निसर्गाचे वरदान
चंद्र, सूर्य ,प्रकाश, किरण, जल
जपा निसर्गाला सांगते संगीता
आज समजले निसर्गाचे मोल

हिरवी हिरवी गर्द मोकळं रान
शुध्द हवा मुबलक आक्सिजन
निसर्गाचे सौंदर्य वाढवू आपण
करू या आपण वृक्ष संवर्धन

संगीता वाल्मीक रामटेके गडचिरोली

मो.९४२३६०४१४०
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 शब्दगंध..

सरस्वतीचे पूजन करुन
प्रभात्समयी नाम स्मरुया
ज्ञान रूपी गंगा वाहुदे
आव्हान तीला करू या 

सौ मधुरा कर्वे. ( भावगंधा )

पुणे.
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 अभंग गणरायाचा

चौसष्ट कलांचा / देव अधिपती
श्री मंगलमूर्ती / गणपती //१//

चौदा विद्येचा तू / सिद्धिविनायक 
गौरी विनायक / सुखकर्ता //२//

प्रथम पूज्य तू / सकलांचा त्राता
नमो बुद्धिदाता / वक्रतुंड //३//

ओंकार स्वरूपा / तुझे गुण गाता
मागतोचि आता / वरदान //४//

आमची प्रार्थना / अधर्म विध्वंस
गौरव मानस / होवो जगा //५//

भव दुःख हारी / हे बुद्धिसागरा
जाण गुणकारा / या भक्तासी //६//

तुज पितृऋण / आलोया शरण
स्पर्शतो चरण / गणराया //७//

नयन धारणकर
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 और क्या चाहिए 

रिश्ता  संभाल  ने के  लिए समझ चाहिए।
एक क़दम मेरा दो कदम आपके  चाहिए।

तेरी फरमाइश  पूरी करते करते में आधा
हो गया हूँ ए दिल  तुझे और क्या चाहिए।

हँसते हुए  ज़िंदगी बिताने  के लिए  मुझे 
कुछ   कड़वी  घूँट  और  ज़हर   चाहिए।

आँखे पढ़कर हमारा हाल पूछ सके ऐसा 
एक इस  ज़माने  में सच्चा इंसान चाहिए।

थोड़ी  ख़ुशी  थोड़े   ग़म  चाहिए  ज़मीन 
में दफ़न होने के लिए  मुझे मिट्टी चाहिए।

      नीक राजपूत

     9898693535

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   रंग  
   
फुलपाखरे
फुलांवर बसती
 रंगसंगती

रंगीबेरंगी
सुंदर मनोहर
उरी बहर

नाजुक पंख
मखमली रंगाचे
वेड जीवाचे

सौ उषा राऊत
 

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