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काव्यपुष्प


भक्तिचा रंग

लागता भाद्रपदाची चाहूल
होई गणेशाचे आगमन ।
हरेका चढे भक्तिचा रंग 
साफसफाई घर अंगण।

सजविले मखर सुंदर
फुलांचा गंध दरवळला।
विद्युत दिव्यांची रोषणाई
थाट बाप्पाचा भाळला।

दुर्वा, जास्वंद, धूप, दीप
नैवद्याला मोदक ठेविले।
पूजेची मांडणी मोहक
दारी तोरण मी लाविले।

मूषक शोभते वाहन
स्वागता चौघडा सनई।
चौसष्ट कलांचा अधिपती
भक्तांस आशीर्वाद देई।

आज कोरोनाचं सावट
थांबव ही संकट गाथा।
विघ्नहर्ता सावर आम्हा
चरणी ठेविते मी माथा।

सौ संगीता बोरसे
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..प्रभा..

सुवर्ण किरणांनी नभी
बांधले प्रभाती तोरण,
सेज दवबिंदूची सजली
झाले प्रसन्न वातावरण.

..नखाते ज्ञानेश्वर..

      .परभणी.
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भगवंत

युगे अनंत लोटली तरी
उरते मागे खंत
खोटे पुराण खोटे कुराण
खोटेच धर्म ग्रंथ
प्रत्येकाच मार्ग वेगळा
उदंड झाले पंथ
दुकान सारे थाटून बसले
मौलवी.. फादर.. महंत
अन्
बडव्यांच्या गर्दित हरवला
माझा खराखुरा भगवंत!

खोटी देतो अजान येथे
खोटीच काकड आरती
खोट्या प्रार्थनेने घायाळ पून्हा 
येशू क्रुसावरती
दर्ग्या मधल्या चादरी आणि
गाभाऱ्यातील नारळ
लाच देतो निर्मिकास
बेगडी भक्तीची झालर
मागल्या दारी.. पुन्हा दुकानी
शोधित नव्या भाविका
तीच चादर तोच नारळ
तोच गुलाल तोच अबीर बुक्का
सगळीकडे नुसता बाजार
मनात नाही भाव रे
देवापर्यंत पोहचण्याला
मनी जापावे नाव रे
नको पुजारी कशास बडवा
आचार्य नि महंत
डोळे मिटूनी आर्त हाक दे
दिसेल रे भगवंत!

अरूण मोर्ये

सत्कोंडी, रत्नागिरी

8806890558

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मोरया मोरया गणपती

ढोल ताशांच्या गजरात, बाप्पा घरी आले
मोरया मोरया गणपती, दर्शन तुमचे झाले ||ध्रु||

एकदंत वक्रतुंड, सिद्धिविनायक मोरया 
भालचंद्र गणाधीश, वरदविनायक मोरया 
देवा जंगी स्वागतास, भक्तीगीत गायले ||१||

आलो शरण आरतीला, वाजवित डंका
मंगलमूर्ती गजानन, नाही मनास शंका
वाढो एकेचि बंधुभाव, स्मरण जाहले ||२||

योगी गणराज गजराज, भाग्यविधाता
करुणाकरा अधिपती, हेचि मागणे आता
लंबोदर विघ्नहर्ता, भाव डोळा साठले ||३||

विश्वंभर शशिवर्णम, विघ्नराजेंद्र मोरया 
शूपकर्ण प्रथमेशाय, दुर्गेश भूपेंद्र मोरया
सुबक मूर्ती दर्शनाने, अंतर्मन सुखावले ||४||

गीतकार : नयन धारणकर

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         आजची  चारोळी

      चित्रपट, कादंबरी सारखी
     आयुष्याची कहानी नसते,
    तो आकाशी चंद्र न्याहाळताना
    ती भाकरीचा चंद्र थापत असते.


   सौ. हेमा जाधव, सातारा

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 .प्रभा..

किलबिल पाखरांची
येते पानातून सळसळ,
झुळूक वाऱ्याची गाते
जणू भूपाळी मंजूळ,

..नखाते ज्ञानेश्वर..

      .परभणी.

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     आजची  चारोळी

   गौरी - गणपतीच्या प्रेमवर्षावात
   गेल्या सुहासिनी न्हाऊन
    आल्या गौराई अंगणी
    सुखसमृद्धी घेऊन


    सौ. हेमा जाधव, सातारा
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 ..प्रभा..

नभांगणी आला रवी
तेज पसरले किरणांचे,
प्रभा सजली सुवर्णात
क्षण चैतन्य आनंदाचे.

..नखाते ज्ञानेश्वर..

      .परभणी.

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शब्दगंध

महादेव, गौरी चे पूजन करून 
सुरवात करूया उत्साहाने
वागवूया मानाने महिलांना 
सर्वांना सुखी ठेवतील आनंदाने 

✍️सौ मधुरा कर्वे. ( भावगंधा )

पुणे.

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 वृत्त : अष्टाक्षरी
 शिर्षक : उपकार 


 बाप जागती मशाल
 माय थंडगार पाणी
 दोघे जळती सोबत;
 अविरत दिव्यावाणी  ||१||

 नाही सुखाचा वर्षाव
 झाली दुःखाची भरती
 दोघे मनाच्या शिवारी ; 
आशा पालवी  पेरती  ||२||

 हर्षे नाही जीवनात
 नाही जगण्याला अर्थ
 पोटी असून लेकरे ;
 कष्ट गेली सारी व्यर्थ  ||३||

 पोरं गेलेत सोडून
 वृद्धकाळी संसारात
 आम्ही झालोत बेघर ;
 कोण घेई पदरात  ||४|| 

 रोज घातले जेवण
 स्वतः उपाशी राहून
 झिंजवला असा देह ;
 बघा चंदन होऊन  || ५||

 बघा चिलांपिलांसाठी
 केली सुखाची रे ! होळी
 तेच लाथाडती  आज ;
 नाही दया माया थोडी  ||६ ||

मायबापा परी थोर
कसे फेडू उपकार
कर्ज डोही ऊतरून 
केली नौका माझी पार||७||

(नितु)

✍️ नितेश एस . खरोले

8329454924
 
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मोरया पायी प्रार्थना

'मोरया मोरया मी बाळ तान्हे' या काव्यातील कळकळ मोहवून गेली आणि त्याचाच परिणाम असेल कदाचित, पण तो भाव जागृत होऊन त्याच पद्धतीने काही ओळी स्फुरत गेल्या आणि मोरयाच्या पायी ही प्रार्थना जन्मास आली... 

मोरया मोरया मी बाळ तान्हे,
तुझीच सेवा करू काय जाणे,
अन्याय माझे कोट्यान कोटी,
मोरेश्वरा बा तू घाल पोटी..।।१।।

मोरया मोरया मी बाळ तान्हे
कळती न मजला शास्त्रे पुराणे।
स्मरणे तुझे रूप आहे पुरेसे।
मूर्ती तुझी पूर्ण चित्तात ठासे।।२।।

मोरया मोरया मी बाळ तान्हे।
कळते न मजला गुणगान करणे।
ओंकार स्वर एक अखंड स्मरणे ।
इतकीच इच्छा परिपूर्ण करणे।।२।।

मोरया मोरया मी बाळ तान्हे।
प्रतिभेस माझ्या परा स्पर्श देणे।
तुझे गूण गाण्यात आयुष्य जावे।
तुझ्या कारणे कर्म सर्वार्थ व्हावे।।३।।

मोरया मोरया मी बाळ तान्हे।
सुटते न माझे अपराध करणे।
क्षमाशील व्हावे देवा दयाळा।
न द्यावे कधी अंतरा रे कृपाळा।।४।।

मोरया मोरया मी बाळ तान्हे।
तुझिया कृपेने भावताप तरणे।
चरणास आलो आशिष द्यावे।
तुझियाच छायेत विश्रांत व्हावे।।५।।  

राजेंद्र वैशंपायन 

 93232 27277
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 दिल की सुनता तो...

अच्छा होता दर्द आँखों तक पहुँच जाता।
बात  बगड़ने से  पहले मैं  संभल  जाता।

अब तक  अंधेरे में था  अगर  पता होता
तो तेरे ख़्वाब आने से पहले जाग जाता।

श्याही में हमारी कहाँनी  थी अगर  कुछ 
लिखता तो  बहोत कुछ तबाह हो जाता।

ये रिश्ता  सात फेरों  तक ले  गया होता 
तो पता  नही  मेरा क्या  हाल हो  जाता।

दिल और दिमाग़  की  लड़ाई  मैं अपने
दिल की  सुनता  तो ज़िंदगी  हार जाता।

    नीक राजपूत

    9898693535

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सृष्टी 

 प्रभात काळी
चैतन्य मनोमनी
तिलक भाळी

सृष्टी फुलली
आनंदाने सर्वत्र
जना भासली

शालू हिरवा
पांघरूण बसली
जीव हळवा


सौ उषा राऊत
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 याद करना

जब वक़्त मिले  तब याद कर लेना।
दो मिनट ही सही बात तो कर लेना।

अगर हो कोई  फरियाद  तो अपनी
बात बताकर मन हलका  कर लेना।

ये तो ज़िंदगी है  ज़्यादा  मत  सोच 
ना थोड़े आँखो से आँसू बहा  लेना।

जिंदगी की  भागदौड़ में तुम थोड़ा
वक़्त  मेरे लिए  भी  निकाल  लेना।

बीते  लम्हों  को  याद  कर  के तुम 
मुश्किल समय में भी मुस्कुरा लेना।


         नीक राजपूत
         9898693535

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विषय:-गौरी पुजन

शीर्षक:-पाव एकदा


गौरी पुजन
मनोभावे करावे
हर्ष भरावे.

सुवासिनींना
बोलवा घरी आज
सोन्याचा साज.

गोडधोड द्या
सर्वांनाच प्रसाद
नको तो वाद.

श्रुंगार करा
हिरवा चुडा घाला
सुमन माला.

वंदन करू
तुज माते सर्वदा
पाव एकदा.

विसर्जनाने
दुःख ते होई फार
संकट तार.

✍️देविदास हरीदास वंजारे 

ता.किनवट जि.नांदेड✍️

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अर्जंट पाहिजेत.
इच्छुक व्यक्तींनी संपर्क साधावा


एक शिंपी पाहिजे,
जो एकमेकांची तुटलेली नाती शिवु शकेल

एक इलेक्ट्रिशियन पाहिजे,
जो एकमेकांशी न
     बोलणाऱ्या दोन व्यक्तीमध्ये पुन्हा
     एकदा कनेक्शन जोडून देईल,

एक ऑप्टिशियन पाहिजे,
 जो लोकांची दृष्टी आणि
     दृष्टीकोन नीट करून देईल,

एक कलाकार पाहिजे,
जो प्रत्येकाच्या चेहऱ्यावर स्मित
     हास्ययाचे रेषा रेखाटू शकेल,

एक बांधकामगार पाहिजे,
 जो दोन शेजाऱ्यांमध्ये
     उत्तम सेतू उभारू शकेल,

एक माळी काका पाहजे,
जो चांगल्या विचारांच
      रोपण करू शकेल,

एक प्लंम्बर पाहिजे,
जो तुंबलेल्या मनांना
     मोकळं करू शकेल,

एक शास्त्रज्ञ पाहिजे,
 जो एकमेकांबद्दलची
     ओढ शोधू शकेल,

आणि सर्वात महत्वाचे म्हणजे,

एक शिक्षक पाहिजे,
जो एकमेकांशी संवाद कसा
     साधायचा ते शिकवू शकेल,

आज तुम्हा-आम्हा, सर्वांना
याचीच नितांत गरज आहे..!!

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