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काव्यपुष्प


श्रीगणेश आगमन
मार्गशीर्ष शुद्ध चतुर्थीला
भक्तांच्या भक्तिला
उधाण...१.. 

घरोघरी तयारी
उत्सवाची चाले जोरात
सारे कामात
व्यस्त...२...

दहा दिवस
उत्सव श्रीगणेशाचा चाले
चैतन्य दरवळे
समाजात...३...

देवा श्रीगणेशा
नाम तुझे घेता
हरतसे चिंता
क्षणार्धात...४.. 

भक्तांसाठी असशी
गजानना तू सुखकर्ता
तू दु:खहर्ता
सदोदित...५...

नानाविध देखावे
मंडळे रस्तोरस्ती उभारती
उत्साहाला भरती
समाजाच्या...६...

लाडूमोदकाचा नैवेद्य
दुर्वाफुले अर्पिती श्रीगजाननाला
वाटती प्रसादाला
भक्तिभावे….७...

देवा गजानना
तूला येऊदे करुणा
पिटाळ कोरोना
यमसदनी…..८….


सुनिता सुरेश महाबळ
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 आजची  चारोळी

गौरी गजाननाच्या कौतुकाचा 
 भरला आनंदसोहळा
गौराईच्या स्वागताला
 जमला सुहासिनींचा मेळा


   सौ. हेमा जाधव, सातारा

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 बाप्पा मोरया

गजकर्ण गजमुख 
देवा गोड तुझे नाव 
मखरात शोभे जैसा
पेशवाई पेहराव 

तेज प्रखर सुंदर 
मुषकावरती स्वार 
चिंतामणी मोरेश्वर
दूर कर रे अंधार

दुःख दरिद्री साठव
तुझ्या रे उदरात
भक्ती हीच दैवी शक्ती
वसे भाव अंतरात

सोंड भारी वक्रतुंड 
मोठे विशाल कपाळ 
चतुर्भुज हस्तिदंत
गळा कंठी मोहमाळ

गणपती विघ्नेश्वर 
तूच तू तारणहार 
विघ्न दूर करण्यास
घेतलासी अवतार

दुर्वा जास्वंदी मोदक 
आवडते तुझे खास 
आम्हा भक्तांच्या असशी
सदा देव आसपास

राहो अशी कृपाप्राप्ती
विघ्नहर्ता गणराया
पाव दर्शनात देव
माझा बाप्पा तू मोरया 

- नयन धारणकर
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        जाणीव

   काय मिळालं नाही याची
  खंत कशाला करायची
  सुखी करते जीवन जाणीव
  काय मिळालं याची

  सुनिता सुरेश महाबळ

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 ..प्रभा..

सुवर्ण किरणांची लाली
दाही दिशांनी पांघरली,
प्रभा सजवी कणकण
सृष्टी सौंदर्याने मोहरली.

..नखाते ज्ञानेश्वर..
      .परभणी.
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 शामलाक्षरी

 जप  तप गजानन
होते कार्मातून मुक्ती
 जप हृदयाचा भाव
जीवन जगणे युक्ती ॥
जप= आवर्तन , जपणे

सौ.शामला पंडित(दीक्षित )
प्रणाली प्रकाशन, चिंचवड

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आशा

सूर्य किरणे
चौफेर पसरली
आशा उरली

सुंदर रुप
सृष्टीचे  हे पाहता
निशा लोपता

मंद गारवा
मना स्पर्शून जातो
रवी हसतो


सौ उषा राऊत
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मातृत्व ....

दिन उजळला सोनियांचा
स्वप्न पडले काल रात्रीला
बाळ सामावले कुशीत माझ्या
क्षण आठवी भरती येई खुशीला

नाळ जुळी तूंतुमय नाजूक
मासल रकतांच्या पेशीची
एकाचे दोन , दोनाचे चार होती
रूपांतर होई प्रतिकृती मानवाची

नवीन रुपांतर  देहाचं बघून
आनंदाने गजबजले शरीर मन
नाजूक कोवळ्या गोळ्याचे
स्वागता करण्या सज्ज झाले तन

एका वेगळ्याच आनंदात रमते
जगण्याची खुशी विश्वात शोधते
आजची मुलगी ,उद्याची आई
होण्यास मनोमन स्वप्न बघते



वलयात वसे हाडं मासाचं कोकरू
जपते त्याला जीवा पल्याड
खाण्यापासून तर उठण्या,बसण्या
आंतरिक भाव कोमल सोज्जवड

नको नको ते स्वप्न रंगवीत
येणाऱ्या तानुल्या बाळासाठी
कुशीत फिरणे ,उड्या मारणे
लगबग होई वर पहाण्यासाठी

आतल्या आत त्याचे हातवारे
आर्त हाक मारतो आतूनच
बाळ आणि आई मधला संवाद
होत असतो आत मनातुनच

त्यालाही जग बघण्याची घाई
आईला गोजिरा बघण्याची घाई
आई बाळाचे नाजूक बंधन राही
आतुरता कवेत घेण्याची होई

संगीता रामटेके गडचिरोली

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 तुम हो...

तुम एक हसीन एहसास हो।
मेरी चाहतों  की  बारिश हो।

कड़ी धूप  जितनी है सुबह 
की  तुम उतने मेरे पास हो।

तुम मेरी  मुस्कान हो खोई 
हुई  अज़नबी पहचान  हो। 

तुम  ही  मेरी  जान हो मेरी 
हर एक  साँस  का राज़ हो।

होंठो पर  गुनगुनाता  हुआ 
तुम  कोई   मधुर  गीत  हो।

तुम ही  मेरा  नाम हो  मेरी
कविताओं का  शीर्षक हो।

किसी   भी  राह  से  गुज़रे 
आख़िर  मंज़िल   तुम  हो।

मेरी दुआओं का  मोहताज
हो तुम ज़न्नति फ़रियाद हो।

मेरी आवाज़ों में भी रब सा
ख्यालों में भी हर जगह हो।

  नीक राजपूत
  9898693535

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 अवयव जोडणी

कोणे एके काळी शंकर नामक
वैद्य रहात होता कैलासावर
जडीबुटी अन् निसर्गोपच तज्ञ
रुग्णसेवेत होता सदैव तत्पर 

नाडी निदान अन् शल्यविशारद 
त्रिखंडात होता शंकराचा गवगवा
रागाचा पारा चढत असला तरी
रुग्णांना हाच वैद्य वाटे हवाहवा

शस्त्रक्रिया यशस्वी झाली की,
आनंदाने पत्नीचे घेतसे दर्शन 
पार्वती कितीही थकली असली
तरी लक्षपूर्वक ऐकतसे वर्णन 

कर्तव्यनिष्ठ वैद्य शंकर पत्नी पार्वती
क्लोन एक रक्षक नेमून गेली स्नानास
कुंडी नाही न्हाणीघरा म्हणून बजावते,
'आत अजिबात सोडू नको कोणास.'

पत्नीला भेटण्यासाठी आतुरलेल्या
शंकरास रक्षकाने दारात अडविले
हातातील शस्त्रक्रियेच्या चाकूने
कोपीष्ट वैद्याने त्याचे मुंडके उडविले

क्लोन असला तरी मानस पुत्रच
पार्वती अशी धायमोकलून रडली
पत्नीचा आक्रोश पाहुन शंकराने
प्राण्याचे तोंड आणण्याची आज्ञा सोडली

अधिक्षकाचा ऐकताच आदेश
सर्व गण वैद्य लागले कामाला
हत्तीचे मुंडके आणले छाटुन
क्लोनाच्या धडावर जोडायला

अद्ययावत कैलास रुग्णालयात
यशस्वी पार पडली अवयव जोडणी
अशीच ऐकत लहानाचे मोठे झालो
बुद्धिवंत गणेशाची जन्म कहाणी

जगदीश अनंत संसारे, मुंबई
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 हिंदी  दिवस

हिंदी हमारे    राष्ट्रीय भाषा  है
हिंदी हमारी     आत्मा        है 
हिंदी हमारी        अस्मिता   है 
हिंदी हमारी       परीभाषा   है 
हिंदी भारत  देश की   शान है
हिंदी मिट्टी     का     मान    है 
हिंदी जन-जन  की  दुलारी है 
हिंदी साहित्य  की फुलवारी है
हिंदी बोलने में  बड़ी  प्यारी है 
हिंदी सुरीली   मधुर   वाणी है 
हिंदी सँस्कृति       लाडली  है 
हिंदी पढ़ने  पढ़ाने  में सहज है
हिंदी शब्दों   का    श्रृंगार    है
हिंदी भावनाओं का विस्तार है
हिंदी एक   मझबूत   धागा  है 
हिंदी भारत की गौरवगाथा  है
हिंदी विकास   की   रेखा    है 
हिंदी नैतिकता   की   भाषा है 
हिंदी आज हर  क्षेत्र में आगे है 
हिंदी हिंदुस्तानी की पहचान है

     नीक राजपूत
    9898693535
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